Saturday, March 2, 2013
Saturday, November 3, 2012
छोटू और सलीम मोहर्रम पर ढोल बजाते हुए
ये विडियो ज़ुरूर देखें !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
uploaded by:-
जुबैर आलम (सोनू )
Saturday, December 3, 2011
जब हम किसी चीज़ को पाने की चाह रखे तो हमे उसकी राह में आने बाली मुश्किलों को याद नहीं करना चाहिए उससे हमारा विश्बास कमज़ोर हो जाता है ..
हमें हमारे लक्ष्य की तरफ और उसकी बजह से मिलने बाली इज्ज़त और तारीफ़ के बारे में सोचना चाहिए इससे हमारा विश्बास और उसे पाने की चाह और बड़ जायेगी...........
लेखक
जुबैर आलम (सोनू )
हमें हमारे लक्ष्य की तरफ और उसकी बजह से मिलने बाली इज्ज़त और तारीफ़ के बारे में सोचना चाहिए इससे हमारा विश्बास और उसे पाने की चाह और बड़ जायेगी...........
लेखक
जुबैर आलम (सोनू )
Saturday, September 17, 2011

नज़र मुझसे मिलाती हो तो तुम शरमा-सी जाती हो
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
जबाँ ख़ामोश है लेकिन निग़ाहें बात करती हैं
अदाएँ लाख भी रोको अदाएँ बात करती हैं।
नज़र नीची किए दाँतों में उँगली को दबाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
छुपाने से मेरी जानम कहीं क्या प्यार छुपता है
ये ऐसा मुश्क है ख़ुशबू हमेशा देता रहता है।
तुम को सब जानती हो फिर भी क्यों मुझको सताती हो?
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
तुम्हारी प्यार का ऐसे हमें इज़हार मिलता है
हमारा नाम सुनते ही तुम्हारा रंग खिलता है
और फिर साज़-ए-दिल पे तुम हमारे गीत गाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
तुम्हारे घर में जब आऊँ तो छुप जाती हो परदे में
मुझे जब देख ना पाओ तो घबराती हो परदे में
ख़ुद ही चिलमन उठा कर फिर इशारों से बुलाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
Thursday, May 27, 2010
एक संवाद माँ के साथ
माँ तुम मुझे याद आती हो
सच ! तुम याद आती हो
कभी आँखो मे आँसू बनकर
कभी दिल मे हौसला बनकर
कभी चेहरे पर मुस्कुराहट बनकर
सच तुम याद आती हो ॥
माँ मै तुम्हैँ देख सकता हूँ
छू नही सकता
मै तुमसे कह सकता हूँ
सुन नही सकता
मै तुम्हैँ महसूस कर सकता हूँ
लिपट नही सकता ॥
माँ मैँ आज भी गीला तौलिया बिस्तर पर भूल जाता हूँ
मैँ आज भी कोई चीज़ ढंग से नही रखता हूँ
मैँ आज भी कमरे मे जूते ले जाता हूँ !
डांटने के लिए ही सही
एक बार तो आओ
आना चाहोगी ?
आ पाओगी ?
अब बच्चा भी नही हूँ
कि समझ लूं तुम आ जाओगी
बड़े होने का दुख भी यही है
कि हम सच जानते हैँ
माँ तुम याद आती
सच ! तुम बहुत याद आती हो ॥ ॥
{समाप्त}
माँ आपका लाडला बेटा ज़ुबैर आलम उर्फ सोनू
सच ! तुम याद आती हो
कभी आँखो मे आँसू बनकर
कभी दिल मे हौसला बनकर
कभी चेहरे पर मुस्कुराहट बनकर
सच तुम याद आती हो ॥
माँ मै तुम्हैँ देख सकता हूँ
छू नही सकता
मै तुमसे कह सकता हूँ
सुन नही सकता
मै तुम्हैँ महसूस कर सकता हूँ
लिपट नही सकता ॥
माँ मैँ आज भी गीला तौलिया बिस्तर पर भूल जाता हूँ
मैँ आज भी कोई चीज़ ढंग से नही रखता हूँ
मैँ आज भी कमरे मे जूते ले जाता हूँ !
डांटने के लिए ही सही
एक बार तो आओ
आना चाहोगी ?
आ पाओगी ?
अब बच्चा भी नही हूँ
कि समझ लूं तुम आ जाओगी
बड़े होने का दुख भी यही है
कि हम सच जानते हैँ
माँ तुम याद आती
सच ! तुम बहुत याद आती हो ॥ ॥
{समाप्त}
माँ आपका लाडला बेटा ज़ुबैर आलम उर्फ सोनू
Wednesday, February 24, 2010
माँ
के दुनिया जिसको माँ कहती है ज़ात बड़ी बा-बरकत है-2
के माँ ऐसी हसती जिसके कदम के नीचे जन्नत है ।
के माँ ने अपने खून-ए-जिगर से दुनिया को सहराब किया-2
के गौश-ए-वलि और पीर-ओ-पैगंबर सबको माँ ने जन्म दिया-2
के माँ के हँसी पैकर मे देखो-3
शान-ए-रव्वुल इज़्ज़त है
के माँ ऐसी हसती जिसके कदम के नीचे जन्नत है
दुनिया----------बरकत है
और घर बाले सब सो जाते है-2
जागती माँ रह जाती है-2
के बच्चे के आराम के खातिर हर दु:ख बो सह जाती है-2
के माँ के आँचल के साये मे-3
चैन-ओ-सुकून है राहत है
के माँ ऐसी हसती जिसके कदम के नीचे जन्नत है
दुनिया-----------बरकत है
और माँ की एक छोटी सी हँसी से-2
दिल का चमन खिल जाता है-2
और माँ की आँख मे आँसू हो तो-2
अर्श-ए-खुदा हिल जाता है
के माँ की अज़मत जो न समझे-3
उस पे खुदा की लानत है
के माँ ऐसी हसती है जिसके कदम के नीचे जन्नत है
दुनिया----------बरकत है
माँ की दुआँऐ लेकर जब मे-2
अपने घर से निकलता हूँ-2
ऐसा लगता है के जन्नत-2
की वादी मे टहलता हूँ
के माँ की दुआ के सदके मे-3
हर-सू-जहाँ मे शोहरत है
माँ ऐसी हसती है जिसके
कदम के नीचे जन्नत है
उसके दिल से जाकर पूछो-2
जिसकी माँ मर जाती है-2
मन का आँगन दिल की दुनिया-2
सब सूना कर जाती है-2
के माँ ही घर की रोनक है-3
और माँ ही ज़ीनत है
अरे ! माँ ऐसी हसती जिसके
कदम के नीचे जन्नत है
दुनिया-----------बरकत है
प्यारे बच्चो तुम भी समझो-2
माँ को दिल से कदर करो
के माँ की खिदमत फर्ज़ है तुम पर-2
माँ को कभी तकलीफ न दो
के शबनम तुम भी समझो माँ के-3
ज़ात सरापा रहमत है
माँ ऐसी हसती है जिसके
कदम के नीचे जन्नत है
दुनिया जिसको माँ कहती है
ज़ात बड़ी बा-बरकत है ।
(मेरी स्वर्गिय माँ की याद मे)
लेखक :ज़ुबैर आलम उर्फ सोनू
के माँ ऐसी हसती जिसके कदम के नीचे जन्नत है ।
के माँ ने अपने खून-ए-जिगर से दुनिया को सहराब किया-2
के गौश-ए-वलि और पीर-ओ-पैगंबर सबको माँ ने जन्म दिया-2
के माँ के हँसी पैकर मे देखो-3
शान-ए-रव्वुल इज़्ज़त है
के माँ ऐसी हसती जिसके कदम के नीचे जन्नत है
दुनिया----------बरकत है
और घर बाले सब सो जाते है-2
जागती माँ रह जाती है-2
के बच्चे के आराम के खातिर हर दु:ख बो सह जाती है-2
के माँ के आँचल के साये मे-3
चैन-ओ-सुकून है राहत है
के माँ ऐसी हसती जिसके कदम के नीचे जन्नत है
दुनिया-----------बरकत है
और माँ की एक छोटी सी हँसी से-2
दिल का चमन खिल जाता है-2
और माँ की आँख मे आँसू हो तो-2
अर्श-ए-खुदा हिल जाता है
के माँ की अज़मत जो न समझे-3
उस पे खुदा की लानत है
के माँ ऐसी हसती है जिसके कदम के नीचे जन्नत है
दुनिया----------बरकत है
माँ की दुआँऐ लेकर जब मे-2
अपने घर से निकलता हूँ-2
ऐसा लगता है के जन्नत-2
की वादी मे टहलता हूँ
के माँ की दुआ के सदके मे-3
हर-सू-जहाँ मे शोहरत है
माँ ऐसी हसती है जिसके
कदम के नीचे जन्नत है
उसके दिल से जाकर पूछो-2
जिसकी माँ मर जाती है-2
मन का आँगन दिल की दुनिया-2
सब सूना कर जाती है-2
के माँ ही घर की रोनक है-3
और माँ ही ज़ीनत है
अरे ! माँ ऐसी हसती जिसके
कदम के नीचे जन्नत है
दुनिया-----------बरकत है
प्यारे बच्चो तुम भी समझो-2
माँ को दिल से कदर करो
के माँ की खिदमत फर्ज़ है तुम पर-2
माँ को कभी तकलीफ न दो
के शबनम तुम भी समझो माँ के-3
ज़ात सरापा रहमत है
माँ ऐसी हसती है जिसके
कदम के नीचे जन्नत है
दुनिया जिसको माँ कहती है
ज़ात बड़ी बा-बरकत है ।
(मेरी स्वर्गिय माँ की याद मे)
लेखक :ज़ुबैर आलम उर्फ सोनू
Wednesday, January 13, 2010
गज़ल
वो पथ्थर दिल नज़र कातिल जो मेरा यार हो जाऐ,
मेरी भी ईद हो जाऐ मेरा त्यौहार हो जाऐ।
सुवह से शाम तक यूंही तेरी गलियोँ मे फिरता हूँ,
न जाने किस बहाने से तेरा दीदार हो जाऐ।
तुझे मै जां लिखूँ जानम लिखूँ जाना ये जानेजां,
यही हर फूल की किस्मत गले का हार हो जाऐ।
मेरी भी ईद हो जाऐ मेरा त्यौहार हो जाऐ।
सुवह से शाम तक यूंही तेरी गलियोँ मे फिरता हूँ,
न जाने किस बहाने से तेरा दीदार हो जाऐ।
तुझे मै जां लिखूँ जानम लिखूँ जाना ये जानेजां,
यही हर फूल की किस्मत गले का हार हो जाऐ।
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