Friday, September 20, 2013

Improve Eyesight

_Eye Exercises
1_ Blink your eyes as fast as you can for some time.
2_ Close the eyes tightly for some time and then open. Do this for 5 times.
3_Roll your eyes in clockwise as well as anticlockwise direction for 5 times.
4_While walking on the road or when you are in an open space, look as far as possible.
5_ Look at an advertisement or some written material from a far place and try to read it by focusing your eyes.

_Food that is good for Eyes

1_ Carrot
2_ Eggs
3_ Milk
4_ Apricots
5_Berries
6_ Black Currants
7_ Cold-water Fish
8_Collard Greens
9_Grapefruits
10_ Grapes
11_ Lemons
12_ Spinach
13_Fish Oils

_Harmful for your eyes
1_ Foods and additives containing Monosodium Glutamate (MSG)
2_ Looking directly into the sun for some time.
3_Drugs which are harmful to the eyes
4_Cell phone games may also be harmful.

Monday, March 18, 2013

Naqaab

मै तो पागल ही हो  गया  नक़ाब में उनकी आँखे देखकर .......
ना  जाने  वो शख्स कैसे रोज़ आइना देखता होगा ......


लेखक
ज़ुबैर  आलम 

Saturday, March 2, 2013

Saturday, November 3, 2012

छोटू और सलीम मोहर्रम पर ढोल बजाते हुए

 छोटू और सलीम मोहर्रम पर ढोल बजाते हुए !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

ये विडियो ज़ुरूर देखें !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!



uploaded by:-

जुबैर आलम (सोनू )

Saturday, December 3, 2011

जब हम किसी चीज़ को पाने की चाह रखे तो हमे उसकी राह में आने बाली मुश्किलों को याद नहीं करना चाहिए उससे हमारा विश्बास कमज़ोर हो जाता है ..
हमें हमारे लक्ष्य की तरफ और उसकी बजह से मिलने  बाली इज्ज़त और तारीफ़ के बारे में सोचना चाहिए इससे हमारा विश्बास और उसे पाने की चाह और बड़ जायेगी...........

 


                                                                                                 लेखक
                                                                                        जुबैर आलम (सोनू )

Saturday, September 17, 2011


नज़र मुझसे मिलाती हो तो तुम शरमा-सी जाती हो
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

जबाँ ख़ामोश है लेकिन निग़ाहें बात करती हैं
अदाएँ लाख भी रोको अदाएँ बात करती हैं।
नज़र नीची किए दाँतों में उँगली को दबाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

छुपाने से मेरी जानम कहीं क्या प्यार छुपता है
ये ऐसा मुश्क है ख़ुशबू हमेशा देता रहता है।
तुम को सब जानती हो फिर भी क्यों मुझको सताती हो?
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

तुम्हारी प्यार का ऐसे हमें इज़हार मिलता है
हमारा नाम सुनते ही तुम्हारा रंग खिलता है
और फिर साज़-ए-दिल पे तुम हमारे गीत गाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

तुम्हारे घर में जब आऊँ तो छुप जाती हो परदे में
मुझे जब देख ना पाओ तो घबराती हो परदे में
ख़ुद ही चिलमन उठा कर फिर इशारों से बुलाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

Thursday, May 27, 2010

एक संवाद माँ के साथ

माँ तुम मुझे याद आती हो
सच ! तुम याद आती हो
कभी आँखो मे आँसू बनकर
कभी दिल मे हौसला बनकर
कभी चेहरे पर मुस्कुराहट बनकर
सच तुम याद आती हो ॥

माँ मै तुम्हैँ देख सकता हूँ
छू नही सकता
मै तुमसे कह सकता हूँ
सुन नही सकता
मै तुम्हैँ महसूस कर सकता हूँ
लिपट नही सकता ॥

माँ मैँ आज भी गीला तौलिया बिस्तर पर भूल जाता हूँ
मैँ आज भी कोई चीज़ ढंग से नही रखता हूँ
मैँ आज भी कमरे मे जूते ले जाता हूँ !

डांटने के लिए ही सही
एक बार तो आओ
आना चाहोगी ?
आ पाओगी ?

अब बच्चा भी नही हूँ
कि समझ लूं तुम आ जाओगी
बड़े होने का दुख भी यही है
कि हम सच जानते हैँ
माँ तुम याद आती
सच ! तुम बहुत याद आती हो ॥ ॥
{समाप्त}

माँ आपका लाडला बेटा ज़ुबैर आलम उर्फ सोनू