Thursday, May 27, 2010

एक संवाद माँ के साथ

माँ तुम मुझे याद आती हो
सच ! तुम याद आती हो
कभी आँखो मे आँसू बनकर
कभी दिल मे हौसला बनकर
कभी चेहरे पर मुस्कुराहट बनकर
सच तुम याद आती हो ॥

माँ मै तुम्हैँ देख सकता हूँ
छू नही सकता
मै तुमसे कह सकता हूँ
सुन नही सकता
मै तुम्हैँ महसूस कर सकता हूँ
लिपट नही सकता ॥

माँ मैँ आज भी गीला तौलिया बिस्तर पर भूल जाता हूँ
मैँ आज भी कोई चीज़ ढंग से नही रखता हूँ
मैँ आज भी कमरे मे जूते ले जाता हूँ !

डांटने के लिए ही सही
एक बार तो आओ
आना चाहोगी ?
आ पाओगी ?

अब बच्चा भी नही हूँ
कि समझ लूं तुम आ जाओगी
बड़े होने का दुख भी यही है
कि हम सच जानते हैँ
माँ तुम याद आती
सच ! तुम बहुत याद आती हो ॥ ॥
{समाप्त}

माँ आपका लाडला बेटा ज़ुबैर आलम उर्फ सोनू

Wednesday, February 24, 2010

माँ

के दुनिया जिसको माँ कहती है ज़ात बड़ी बा-बरकत है-2
के माँ ऐसी हसती जिसके कदम के नीचे जन्नत है ।

के माँ ने अपने खून-ए-जिगर से दुनिया को सहराब किया-2
के गौश-ए-वलि और पीर-ओ-पैगंबर सबको माँ ने जन्म दिया-2
के माँ के हँसी पैकर मे देखो-3
शान-ए-रव्वुल इज़्ज़त है
के माँ ऐसी हसती जिसके कदम के नीचे जन्नत है

दुनिया----------बरकत है

और घर बाले सब सो जाते है-2
जागती माँ रह जाती है-2
के बच्चे के आराम के खातिर हर दु:ख बो सह जाती है-2
के माँ के आँचल के साये मे-3
चैन-ओ-सुकून है राहत है
के माँ ऐसी हसती जिसके कदम के नीचे जन्नत है

दुनिया-----------बरकत है

और माँ की एक छोटी सी हँसी से-2
दिल का चमन खिल जाता है-2
और माँ की आँख मे आँसू हो तो-2
अर्श-ए-खुदा हिल जाता है
के माँ की अज़मत जो न समझे-3
उस पे खुदा की लानत है
के माँ ऐसी हसती है जिसके कदम के नीचे जन्नत है

दुनिया----------बरकत है

माँ की दुआँऐ लेकर जब मे-2
अपने घर से निकलता हूँ-2
ऐसा लगता है के जन्नत-2
की वादी मे टहलता हूँ
के माँ की दुआ के सदके मे-3
हर-सू-जहाँ मे शोहरत है
माँ ऐसी हसती है जिसके
कदम के नीचे जन्नत है

उसके दिल से जाकर पूछो-2
जिसकी माँ मर जाती है-2
मन का आँगन दिल की दुनिया-2
सब सूना कर जाती है-2
के माँ ही घर की रोनक है-3
और माँ ही ज़ीनत है
अरे ! माँ ऐसी हसती जिसके
कदम के नीचे जन्नत है

दुनिया-----------बरकत है

प्यारे बच्चो तुम भी समझो-2
माँ को दिल से कदर करो
के माँ की खिदमत फर्ज़ है तुम पर-2
माँ को कभी तकलीफ न दो
के शबनम तुम भी समझो माँ के-3
ज़ात सरापा रहमत है
माँ ऐसी हसती है जिसके
कदम के नीचे जन्नत है

दुनिया जिसको माँ कहती है
ज़ात बड़ी बा-बरकत है ।



(मेरी स्वर्गिय माँ की याद मे)

लेखक :ज़ुबैर आलम उर्फ सोनू

Wednesday, January 13, 2010

गज़ल

वो पथ्थर दिल नज़र कातिल जो मेरा यार हो जाऐ,
मेरी भी ईद हो जाऐ मेरा त्यौहार हो जाऐ।
सुवह से शाम तक यूंही तेरी गलियोँ मे फिरता हूँ,
न जाने किस बहाने से तेरा दीदार हो जाऐ।
तुझे मै जां लिखूँ जानम लिखूँ जाना ये जानेजां,
यही हर फूल की किस्मत गले का हार हो जाऐ।